प्रगत पदार्थ एवं धारणीय संरचनाएं

सीएसआईआर-एसईआरसी कंक्रीट के विभिन्न प्रकारों के विकास में अनुसंधान & विकास कार्य कर रही है (जैसे पॉलिमर इम्प्रेग्नेटड (सम्मिलित) कंक्रीट, औद्योगिक सह-उत्पादनों का उपयोग करते हुए सिमेंट प्रतिस्थापन पदार्थ जैसा कंक्रीट, फेरोसिमेंट, जियोपालिमर कंक्रीट)। विकास किए गए इन पदार्थों पर अभिकलनी और प्रयोगात्मक अध्ययन (जैसे पर्यावरणीय और यांत्रिकी) कार्य करने के लिए और इन पदार्थों से तैयार किए गए संरचनात्मक घटक / प्रणालियों के निष्पादन को समझने के लिए सीएसआईआर-एसईआरसी में अति आधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञता भी उपलब्ध है।

बहुस्तरीय नमूनीकरण, नैनो अभियांत्रिकी, इष्टतमीकरण तकनीक, कार्यात्मक रूप से वर्गीकृत पदार्थ आदि का उपयोग करते हुए नए और नवीकृत पदार्थों के अभिकल्प के लिए अनुसंधान & विकास विशेषज्ञता के विकास के लिए यहाँ पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। विभिन्न स्तर के मापन (नैनो-सूक्षम-मीसो और मैक्रा) से बृहत स्तर पर जॉंच कार्य करके पदार्थ एवं संरचनाओं / घटकों के गुणधर्म / प्रतिक्रिया को समझने के लिए जॉंच कार्य करना ही अति प्रधान है। इंटर डिसिप्लनरी डोमैन (अभियांत्रिकी विज्ञान) में कार्य करके अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकी को सहयोग देने केलिए यहॉं पर अद्वितीय मौके उपलब्ध हैं। इससे विभिन्न स्तरों पर विकसित पदार्थों के प्रतिक्रिया-संयुक्त-प्रक्रमण-संरचना-गुणधर्म-निष्पादन विशेषताओं - को जानना आसान हो जाती है। वर्तमान में यह विश्व भर की अनुसंधान कार्यकलाप है और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी में वर्तमान विकासों को जोडने केलिए मौका देती है।

इसके अलावा अन्वेषण के लिए हल्केभार और अत्यधिक सामर्थ्यवाले पदार्थ, जैसे रेशा प्रबलित प्लास्टिक को प्राइमरी संरचनात्मक पदार्थ, हरित निर्माण के लिए  वैकल्पिक पदार्थ जैसा निर्मित रेत और पूर्व-अभियांत्रित संरचनाएं / घटक आदि हैं। टिकाऊपन आधारित सर्वीस लाइफ अभिकल्प केलिए प्रणाली विज्ञान के विकास की भी जरूरत है, लघु और दीर्घकालिक यांत्रिक गुणधर्मों के विशेषताओं को समझने केलिए विभिन्न तापमान और वातावरणीय परिस्थितियों के अंतर्गत विकसित पदार्थां के निष्पादन के मूल्यांकन की भी आवश्यकता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो अंतर्राष्ट्रीय सहयोग केलिए पर्याप्त  अवकाश का संभरण करती है।

जैसे आई एस ओ 15392 में उदृधृत किया गया, धारणीय विकास की चुनौती वैश्विक है, भवन निर्माण में धारणीयता की प्राप्ति क्षेत्र आधारित होती है और एक-एक क्षेत्र से स्थान एवं निहित वस्तुओं से फरक पडती है। इससे यह मालूम पडता है कि धारणीय आधार संरचना प्रणालियों की प्राप्ति केलिए समग्र अभिकल्प और अनुरक्षण उपागमनों के विकास केलिए अनुसंधान & विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता है। पालन अवधारणा को पालने के लिए निर्माण वस्तुओं का पुनः उपयोग और निर्माण में व्यर्थ पदार्थों के उपयोग पर विशेषतः अनुसंधान & विकास कार्य करना ही आज अति प्रामुख्य विषय है।

प्रणाली की पूरी व्यवस्था का संपूर्ण विश्लेषण किए बिना, धारणीयता की प्राप्ति निराधार रहती है। चुने गए आधार संरचना अनुप्रयोगों की धारणीयता के बारे में प्रतिक्रिया सूचना भी आगे की इष्टतमीकरण में उपयोग होती है। इसके लिए आवश्यक है-वस्तुओं का अभिकल्प, संरचनात्मक अनुप्रयोग और धारणीय नमूनीकरण सहित फ्रेमवर्क का विकास। सुरक्षित और टिकाऊ भवन एवं संरचनाओं से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में सीएसआईआर-एसईआरसी अनुसंधान & विकास जॉंच कार्य कर रही है। लेकिन फिर भी, धारणीय संरचनाओं को समझने केलिए धारणीयता संबंधी सूची के लक्षण-वर्णन के क्षेत्रों में धारणीयता की मांग को पूरा करने केलिए वस्तुओं को चुनना और अभियांत्रिकीकरण, निष्पादन-आधारित सेवाकाल अभिकल्प (धारणीयता सूची को ध्यान में रखते हुए) और धारणीय संरचनाओं को समझने केलिए नए निर्माण प्रौद्योगिकियों की जरूरत है और इसके लिए सकेंद्रित अ & वि जॉंच कार्य करने की आवश्यकता है।