घोर-विपत्ति अनुसंधान क्षेत्र

सीएसआईआर-एसईआरसी वर्ष 1970 से ही चक्रवात विपत्ति प्रशासन पर कार्य कर रही है। भूकंप घोरविपदा प्रशामन में और विस्फोट-प्रतिरोध संरचनाओं में भी सुविज्ञता का विकास किया है। उसके सबूत हैं - वायु अभियांत्रिकी प्रयोगशाला, एस्टार प्रयोगशाला और टावर परीक्षण एवं अनुसंधान स्टेशन की सुविधाएं आदि जो पूरे ऐशिया में कहीं भी उपलबध नहीं हैं। औद्योगिक एवं  सामरिक क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान केलिए एस्टार प्रयोगशाला पृथप्रदर्शकवाले परीक्षणों का संचालन कर रही है। वायु अभियांत्रिकी प्रयोगशाला सूपर चक्रवात के समय उपयुक्त विशेष आश्रय का अभिकल्प करके रेड क्रास सोसाइटी को विशेष सहायता की। जीवन की बचत के लिए विस्फोटकों को सुरक्षित रखने केलिए विस्फोट-प्रतिरोध संरचनात्मक अभिकल्प द्वारा रक्षा प्रतिष्ठापनों की क्षमता को सुदृढ बनाया। इन अभिकल्पों को बृहत पैमाने पर अद्वितीय क्षेत्र परीक्षणों द्वारा सत्यापन किया गया। फिर भी, प्राकृतिक और मानव तैयरित संकट मूल्यांकन के समय संरचनाओं का कंपन नियंत्रण और जोखिम मूल्यांकन क्षेत्र में, अनुसंधान & विकास सुविज्ञता को विकास करने की अत्यधिक जरूरत है। अनुसंधान का यह क्षेत्र सचमुच ट्रांस-डिसिप्लीनरी है क्योंकि सीएसआईआर-एसईआरसी में स्थापित सोशल साइन्स, आचरण विज्ञान, भौतिक विज्ञान, संकटों की प्रागुक्ति केलिए प्रगत पध्दतियों का मानिटरिंग आदि जैसे अनेकानेक अनुसंधान परिणामों का संभरण करके असाधारण सुअवसरों को संघटित कर सकती है।

निर्मित पर्यावरण की क्षति की प्रशामन में उपयोग होनेवाले उपर्युक्त  संरचनात्मक योजनाओं का विकास भी घोर विपत्ति प्रशामन में अनुसंधान & विकास का चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। घोरविपत्ति खतरा प्रशामन 2015-2030 केलिए The Sendai framework में नोट किए अनुसार, घोरविपत्ति खतरा प्रशामन केलिए विपदा आधारसंरचना का विकास पर बल देना अत्यंत आवश्यक है। इस क्षेत्र में वस्तुओं के बारे में संपूर्ण व्यापक सूचना, कंपन नियंत्रण योजनाएं, संवेदक प्रबंधन और ग्राफिक उपयोग अंतराफलक आधारित विभिन्न परिदृश्यों को सिमुलेट करते हुए उपभोक्त-हितैषी निकास योजनाओं का विकास करना अत्यंत आवश्यक है। रूपांतरित अनुसंधान के जरिए, सीएसआईआर-एसईआरसी निष्पादन-आधारित अभिकल्प कोडों के विकास की दिशा में कार्यरत है। चुने गए स्थान (संभाव्यता भूकंप संकट विश्लेषण (PSHA) आधारित भारत का मानचित्र) के भूकंप जोखिम की निर्धारण की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।