सीएसआईआर-एसईआरसी एवं गति शक्ति विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन
सीएसआईआर-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र तथा गति शक्ति विश्वविद्यालय के बीच अवसंरचना एवं परिवहन अभियांत्रिकी के क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा तथा क्षमता निर्माण में सहयोगात्मक प्रयासों को सुदृढ़ करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
सीएसआईआर के मिशन मोड परियोजना " अपशिष्ट से धन: वृत्ताकार अर्थव्यवस्था और स्थिरता की दिशा में व्यापक समाधान " के अंतर्गत सतत अभियांत्रिकी पुनर्चक्रित कंक्रीट (...
सीएसआईआर के मिशन मोड परियोजना " अपशिष्ट से धन: वृत्ताकार अर्थव्यवस्था और स्थिरता की दिशा में व्यापक समाधान " के अंतर्गत सतत अभियांत्रिकी पुनर्चक्रित कंक्रीट (...
सीएसआईआर मिशन मोड परियोजना “अपशिष्ट से धन: वृत्ताकार अर्थव्यवस्था और स्थिरता की दिशा में व्यापक समाधान” के अंतर्गत, सीएसआईआर परिसर में सतत अभियांत्रिकी पुनर्चक्रित कंक्रीट (एसईआरसी) प्रदर्शन भवन का उद्घाटन किया गया, जिसमें नवोन्मेषी एवं सतत निर्माण प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया।
सीएसआईआर-एसईआरसी टीम को आपातकालीन परिस्थितियों में विद्युत पारेषण प्रणालियों की तीव्र पुनर्स्थापना एवं पुनर्प्राप्ति से संबंधित यूएस पेटेंट प्रदान किया गया है।
सीएसआईआर-एसईआरसी टीम को आपातकालीन परिस्थितियों में विद्युत पारेषण प्रणालियों की तीव्र पुनर्स्थापना एवं पुनर्प्राप्ति से संबंधित यूएस पेटेंट प्रदान किया गया है।
सीएसआईआर-एसईआरसी टीम को हाल ही में यूएस पेटेंट संख्या 12,637,873 प्रदान किया गया है। यह नवाचार आपातकालीन परिस्थितियों में विद्युत पारेषण प्रणालियों की तीव्र पुनर्स्थापना एवं पुनर्प्राप्ति को सक्षम बनाता है। चक्रवात, भूकंप एवं भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ संरचनात्मक अवयवों की चोरी तथा आतंकवादी हमलों जैसी मानव-जनित घटनाएँ भी ट्रांसमिशन लाइन टावरों के ध्वस्त होने का कारण बन सकती हैं। यह पेटेंटेड तकनीक ऐसी गंभीर परिस्थितियों से निपटने तथा विद्युत अवसंरचना की मजबूती एवं लचीलापन बढ़ाने हेतु एक प्रभावी समाधान प्रदान करती है।
सीएसआईआर-एसईआरसी में वस्त्र -प्रबलित कंक्रीट आदिप्ररूप प्रौद्योगिकी (टीआरसीपीटी)।
सीएसआईआर-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र (सीएसआईआर-एसईआरसी), चेन्नई, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर), नई दिल्ली के तहत राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में से एक है , इस संस्थान ने वस्त्र -प्रबलित कंक्रीट (टीआरसी) उत्पादों के उत्पादन के लिए अग्रणी प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं।
प्रबलित कंक्रीट (आरसी) निर्माण उद्योग में सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली निर्माण सामग्री में से एक है। हालाँकि, आरसी का एक महत्वपूर्ण नुकसान यह है कि इसके स्टील सुदृढीकरण में संक्षारण लगने का खतरा होता है। वस्त्र -प्रबलित कंक्रीट (टीआरसी) एक अभिनव मिश्रित सामग्री है जो वैश्विक निर्माण उद्योग में तेजी से प्रगति कर रही है।
वस्त्र -प्रबलित कंक्रीट आदिप्ररूप प्रौद्योगिकी (टीआरसीपीटी) में हरित और नवोन्वेषी निर्माण पद्धतियां शामिल हैं जो सांचों की आवश्यकता के बिना उत्पादों के निर्माण को सक्षम बनाती हैं। उद्योग के आकलन के अनुसार, टीआरसीपीटी संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक प्रीकास्ट उत्पादों के उत्पादन की सुविधा प्रदान करके निर्माण क्षेत्र में मल्टी-विटामिन अवधारणा को दोहराता है।
सीएसआईआर-एसईआरसी में विकसित टीआरसीपीटी को 2022 में शीर्ष 100 भारतीय नवाचारों में से एक के रूप में पहचाना गया है।
सीएसआईआर-एसईआरसी और एलएंडटी कंस्ट्रक्शन के बीच लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च 2024) के अवसर पर, सीएसआईआर-एसईआरसी और एलएंडटी कंस्ट्रक्शन - वॉटर एंड एफ्लुएंट ट्रीटमेंट आईसी, चेन्नै के बीच सीएसआईआर-एसईआरसी के निदेशक की उपस्थिति में प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए एक लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया, जिसका शीर्ष था " टेक्सटाइल रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट प्रोटोटाइपिंग टेक्नोलॉजी (TRCPT) ”। इस प्रौद्योगिकी का विकास प्रधान वैज्ञानिक डॉ. (श्रीमती) स्मिता गोपीनाथ ने किया। एलएंडटी की ओर से मुख्य इंजीनियरिंग प्रबंधक श्रीमती शक्ति चित्रा ने लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किया । .
सीएसआईआर-एसईआरसी ने जीआरएसई के लिए मॉड्यूलर स्टील ब्रिज (प्र्मापीय इस्फात पुल) का लोड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया
सीएसआईआर-एसईआरसी ने जीआरएसई के लिए मॉड्यूलर स्टील ब्रिज (प्र्मापीय इस्फात पुल) का लोड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया
A modular steel bridge of 200 feet span and 5.3 m width was tested under 70R (100 tons of load) loading as per IRC-6 by CSIR-SERC for Garden Reach Shipbuilders, Kolkata on 1st and 2nd Feb 2024 at GRSE premises. Two nos of 70R loads were sequentially positioned on the bridge as per IRC-6. The bridge was extensively instrumented with strain gauges, LVDTs and dial gauges to measure the strains and deflections at critical locations. The test was successfully completed and the bridge passed the load test.
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे में टीआरसी सीमा दीवार की परिनियोजन
सीएसआईआर – संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र, चेन्नै ने हदबंदी और सीमा दीवार निर्माण के लिए लागत प्रभावी और लागू करने में आसान वस्त्र प्रबलित कंक्रीट (टीआरसी) पैनल विकसित किया है। टीआरसी में सुदृढीकरण के रूप में बारीक दाने वाले सीमेंटयुक्त बाइंडर और स्वदेशी क्षार प्रतिरोधी ग्लास टेक्सटाइल शामिल हैं। टीआरसी हदबंदी के फायदे हैं :- टिकाऊपन, हल्के वजन, स्थल में और कारखानों में आसान उत्पादन, पूर्वगढित प्रकृति, आसान परिवहन क्षमता आदि। टीआरसी हदबंदी भारतीय बाजार में एक नया उत्पाद है, अतः, भारत में इसका उपयोग तकनीकी वस्त्र उत्पादन को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। इस तरह के हदबंदी पैनलों का दायरा विभिन्न प्रकार की बुनियादी परियोजनाओं के लिए दीवार निर्माण आवश्यकताओं के अनुकूल कर सकते हैं, जैसे :- हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों में राज मार्ग के लिए दीवार हदबंदी (आरओडब्ल्यू), रेलवे परियोजनाओं, सौर ऊर्जा परियोजना की सीमा दीवारों और एसईजेड भूमि सीमा दीवारों और सीमा प्रबंधन के लिए दीवार हदबंदी लगाना।
साइट पर टीआरसी हदबंदी का कार्यान्वयन बहुत ही आसान है और इनका निवेशन एक पैनल के रूप में किया जा सकता है। स्थल की आवश्यकताओं के अनुरूप 1 मीटर से 2.4 मीटर तक की पैनल लंबाई विकसित की गई है। प्रस्तावित टीआरसी हदबंदी पैनलों के उत्पादन या कार्यान्वयन के लिए किसी भारी मशीनरी की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में पूर्वगढित कंक्रीट और पूर्वबलित कंक्रीट का उपयोग करके पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली हदबंदी की तुलना में, प्रस्तावित मुड़े हुए टीआरसी पैनल हदबंदी और सीमा दीवार अनुप्रयोगों के लिए सामग्री लागत, परिवहन लागत, सीमेंट की खपत और हल्के वजन प्रदान करते हैं। इसके अलावा, वस्त्र प्रबलित कंक्रीट में गैर-संक्षारक होने का अनूठा लाभ भी है। न्यूनतम रखरखाव, निर्माण समय और जोखिम को कम करना, सामग्री का उपयोग कम करना, जीवन चक्र लागत को कम करना और धारणीय निर्माण आदि टीआरसी सीमा दीवारों का उपयोग करने से लाभ हैं।
सीएसआईआर-एसईआरसी, चेन्नै में विकसित "हदबंदी दीवार अनुप्रयोगों के लिए वस्त्र प्रबलित कंक्रीट हदबंदी प्रौद्योगिकी" को गैर-अनन्य आधार पर एल & टी कंस्ट्रक्शन (ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर आईसी), मुंबई को लाइसेंस पर दिया गया है। एल & टी, मुंबई द्वारा दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे परियोजना पैकेज में 70 मीटर का एक परीक्षण खंड रतलाम के पास लगाया गया है।
सीएसआईआर-एसईआरसी में आईजीएसटीसी द्वारा वित्त पोषित इंडो-जर्मन परियोजना "क्लीनवाटर" का कार्य समापन
इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट "क्लीनवाटर" के अंतर्गत, प्रोजेक्ट कंसोर्टिया में शामिल सीएसआईआर–संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र (सीएसआईआर-एसईआरसी), चेन्नै आईआईटीमद्रास, चेन्नै; रैना इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (मुंबई); आरडब्ल्यूटीएच आचेन विश्वविद्यालय, जर्मनी में इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइलटेक्नोलॉजी (आईटीए); और बेटोनवेर्क हेंत्शेल जीएमबीएच, एल्स्टरवर्डा ने मॉड्यूलर और विकेन्द्रीकृत वस्त्र प्रबलित कंक्रीट अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का उपयोग करके ग्रामीण और उप-शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट जल उपचार को सक्षम करने के लिए एक संसाधन-कुशल समाधान विकसित किया।
निर्माण सामग्री के रूप में गैर-संक्षारक वस्त्र-प्रबलित कंक्रीट (टीआरसी) के अनुप्रयोग ने हल्के निर्माण और संसाधनों के संरक्षण के नए अवसर खोले। पारंपरिक निर्माण सामग्रियों की तुलना में अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों में इनके उपयोग से कम रखरखाव और बेहतर स्थायित्व का लाभ है। इस परियोजना में, वस्त्र विनिर्देश आईटीए आरडब्ल्यूटीएच द्वारा विकसित किए गए; टीआरसी के लक्षण वर्णन और स्थायित्व अध्ययन आईआईटी मद्रास में आयोजित किए गए; सीएसआईआर-एसईआरसी में संख्यात्मक नमूनीकरण, संरचनात्मक अभिकल्प और परीक्षण किया गया; और स्थल में इनका परिनियोजन रैना इंडस्ट्रीज द्वारा किया गया। स्थल पर कार्यान्वयन के लिए परियोजना में विकसित 2.4m3 क्षमता की टीआरसी विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार मॉड्यूलर इकाइयों को दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग के लिए पहुंचाए जा सकते हैं। ऐसा ही एक कार्यान्वयन 6 अक्टूबर 2023 को समता विद्यालय, पुणे, महाराष्ट्र में पूरा किया गया है, जिससे 1000 छात्र लाभार्थी होंगे। इसके अलावा, टीआरसी सामग्री की हल्की प्रकृति के कारण इनको किसी भी भारी-भरकम उपकरण के बिना ही परिवहन और कार्यान्वयन किया जा सकता है।
"क्लीनवाटर" परियोजना की पूरी टीम डीएसटी (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार) को अनुसंधान परियोजना के वित्तपोषण के लिए और इंडो-जर्मन विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) और बीएमबीएफ, (संघीय शिक्षा और अनुसंधान मंत्रालय), जर्मनी, डीएलआर प्रोजेक्टट्रैगर, जर्मनी के बीच "क्लीनवाटर" अनुसंधान परियोजना के समन्वय के लिए के लिए धन्यवाद देती है।
पटना में गंगा नदी पर दूसरे सबसे लंबे रेल-सड़क पुल जे पी सेतु के निष्पादन का मूल्यांकन और व्यापक उपकरण और क्षेत्र जांच का उपयोग करके गतिशील प्रतिक्रिया माप के आधार पर...
पटना में गंगा नदी पर दूसरे सबसे लंबे रेल-सड़क पुल जे पी सेतु के निष्पादन का मूल्यांकन और व्यापक उपकरण और क्षेत्र जांच का उपयोग करके गतिशील प्रतिक्रिया माप के आधार पर...
पटना में गंगा नदी पर जय प्रकाश नारायण सेतु पुल (जेपी सेतु, बीआर नंबर 7) दूसरा सबसे लंबा रेल-सड़क पुल है जिसे वर्ष 2016 में सेवा के लिए चालू किया गया था। हालाँकि, सेवा की अवधि के दौरान पुल के कुछ जोड़ों और पॉट बेयरिंग सपोर्ट में संकट दिखाई देने लगी। पूर्व मध्य रेलवे ने संकट के कारणों का अध्ययन करने और पुल की मरम्मत के लिए उपकरण, गतिशील परीक्षण और संख्यात्मक सिमुलेशन (अनुरूपता) अध्ययन के माध्यम से पुल के कुछ विशिष्ट हिस्सों को पूरा जांच करने का कार्य सीएसआईआर-एसईआरसी को सौंपा है। पुल की कुल लंबाई लगभग 4.5 किमी है, जिसमें 123 मीटर के 36 स्पैन हैं, जो ट्रस गर्डर्स के माध्यम से समर्थित हैं, निचले डेक स्तर पर रेल और शीर्ष डेक पर सड़क हैं। जांच के लिए पुल के तीन विशिष्ट स्पैनों की पहचान की गई, और सहायक पॉट बेयरिंग के विक्षेपण, विभिन्न घटकों पर तनाव, कंपन और रोटेशन को मापने के लिए व्यापक उपकरण योजना तैयार की गई। इस से पूरे पुल को यंत्रीकृत किया गया और विभिन्न स्थैतिक और गतिशील परीक्षण परिदृश्यों के लिए पूरी तरह से भरी हुई परीक्षण गाडी से एकल एवं विलोम दिशाओं में परीक्षण किया गया। चलते ट्रेन की परिचालन स्थितियों के तहत पुल के पूरे बर्ताव को समझने के लिए इस प्रकार का परीक्षण पहली बार अपनाया गया। वाहन-ट्रैक-पुल इंटरेक्शन मॉडल (अंतः क्रिया नमूनों) का उपयोग करके ट्रेन संरचनाओं के गतिशील परीक्षण चलाने के मामलों का अनुकरण करते हुए विस्तृत संख्यात्मक सिमुलेशन अध्ययन किए गए। इस प्रकार की गई जांच के आधार पर, ईसीआर (प म रे) को, की गई जांच, संकट मूल्यांकन और पुल के अभिकल्पित लोडिंग और गति की पूर्ण सेवा चरण को उपयोग में लाने के लिए अपनाई जाने वाली मरम्मत सिद्धांत के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी विवरण दिया जाएगा।
अभूतपूर्व विशाल हिमानी मलबे के प्रवाह से प्रभावित तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना (4 X 130 मेगावाट) की आरसीसी संरचनाओं की स्थिति का आकलन।
अभूतपूर्व विशाल हिमानी मलबे के प्रवाह से प्रभावित तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना (4 X 130 मेगावाट) की आरसीसी संरचनाओं की स्थिति का आकलन।
नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) उत्तराखंड के जोशीमठ के तपोवन में अलकनंदा नदी पर अनुप्रवाह की ओर स्थित 520 मेगावाट के जलविद्युत शक्ति संयंत्र का निर्माण कर रहा है। इस बिजली संयंत्र के लिए, धौलीगंगा नदी पर 3,100 किमी2 के जलग्रहण क्षेत्र के साथ एक बांध निर्माणाधीन है। इस बांध की मुख्य संरचना में नदी-बाँध संरचना, सेवन (अन्तर्ग्रहण) संरचना, गाद निकालने की संरचना और सुरंग बनाना शामिल है। 7 फरवरी 2021 को एक अभूतपूर्व विशाल हिमनद मलबे का प्रवाह हुआ और उसके बाद मलबे/गाद/बोल्डर/बर्फ/चट्टान के टुकड़ों/मिट्टी/पेड़ों आदि से भरी विनाशकारी बाढ़ ने निर्माणाधीन बैराज को भर दिया। इस प्राकृतिक आपदा के कारण, सभी बांध संरचनाएं गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं हैं और पुल के डेक स्लैब, हेड ऑपरेटिंग रूम और रेडियल गेट बह गए, एक ब्रेस्ट दीवार पूरी तरह से कट गई और दूसरी ब्रेस्ट दीवारें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं।
बाँध, अंत्र्ग्रहण और डी-सिल्टिंग (अवसदन) चैंबर सहित विभिन्न बांध संरचनाओं की स्थिति का आकलन करने के लिए और बांध संरचना को भविष्य में उपयोग करने की संभावना के बारे में विचार करने के लिए एनटीपीसी ने इस समस्या को सीएसआईआर-एसईआरसी को सौंपा।
सीएसआईआर-एसईआरसी ने राष्ट्रीय महत्व की इस चुनौतीपूर्ण परियोजना पर कार्य करना आरंभ किया और बांध की संरचना पर विस्तृत वैज्ञानिक जांच किया, जिसमें ये सब शामिल हैं (i) बांध संरचना का दृश्य अवलोकन, (ii) एनडीटी के माध्यम से कंक्रीट की गुणवत्ता और अखंडता का मूल्यांकन / अ-विनाशक परीक्षा के माध्यम से कंक्रीट की गुणवत्ता और अखंडता का मूल्यांकन, (iii) कुल स्टेशन सर्वेक्षण के माध्यम से ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज संरेखण सुनिश्चित करना, (iv) भूवैज्ञानिक मापदंडों का आकलन, (v) गुणवत्ता आश्वासन और गुणवत्ता नियंत्रण पद्धति प्रदान करना। इन सबको युद्ध स्तर के आधार पर एनटीपीसी को उचित उपचारात्मक समाधान प्रदान किया गया, जिसके आधार पर तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की क्षतिग्रस्त बांध संरचना को पुनः स्थापित (बहाल) किया जा रहा है
ध्वनिक उत्सर्जन (एई) और प्रगत अ-विनाशक मूल्यांकन (एनडीई) तकनीक द्वारा पोलावरम बांध परियोजना की स्पिलवे संरचना के पूर्वदबित ट्रूनियन बीम का अखंडता मूल्यांकन
ध्वनिक उत्सर्जन (एई) और प्रगत अ-विनाशक मूल्यांकन (एनडीई) तकनीक द्वारा पोलावरम बांध परियोजना की स्पिलवे संरचना के पूर्वदबित ट्रूनियन बीम का अखंडता मूल्यांकन
भारत की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं में से एक है पोलावरम बांध परियोजना, आंध्र प्रदेश में पश्चिम गोदावरी जिले के पोलावरम मंडल के रामय्यापेट गांव के पास गोदावरी नदी पर स्थित है। यह आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, विशाखापत्तनम, पश्चिम गोदावरी और कृष्णा जिलों में सिंचाई, जल विद्युत और पेयजल सुविधाओं के विकास के लिए एक बहुउद्देशीय प्रमुख टर्मिनल जलाशय परियोजना है। बांध का विस्तार लगभग 1.2 किमी है, जिसमें एक घाट की ऊंचाई 54 मीटर है और कुल 48 रेडियल द्वार (16 मीटर x 20 मीटर) हैं जो 49 पूर्वदबित ट्रूनियन बीम्स (9.5 मीटर से 16 मीटर तक के भिन्न-भिन्न 5.5 मीटर x 5.5 मीटर अनुभाग और लंबाई के हैं) से जुड़े हुए हैं। बांध की स्पिलवे संरचना के पूर्वदबित ट्रूनियन बीम की अखंडता का आकलन करने के लिए, पोलावरम सिंचाई परियोजना, हेड वर्क्स सर्कल (पीआईपीएचडब्ल्यू), धवलेश्वरम, पूर्वी गोदावरी जिला, आंध्र प्रदेश ने सीएसआईआर-एसईआरसी को सभी 49 ट्रूनियन बीम्स पर अखंडता मूल्यांकन के लिए विभिन्न ध्वनिक उत्सर्जन (एई) की श्रृंखला का संचालन और प्रगत अ-विनाशक मूल्यांकन परीक्षण करने के लिए एक परियोजना सौंपी। कंक्रीट के अंदर खामियों/असंततताओं की उपस्थिति को पहचानना, जहां बृहत आकार, सतह कंक्रीट के पास सुदृढीकरण सलाखों की अधिक मात्रा, पूर्वदबित नालिका, केबल और ग्राउट, कंक्रीट सतह के अंदर दरार की सम्भावना की उपस्थिति के कारण पारंपरिक अ-विनाशक मूल्यांकन विधियों से किया नहीं जा सकता।
ट्रूनियन बीम के स्वास्थ्य की जांच के विशिष्ट कार्य के लिए पहली बार एक व्यापक और बहु-बिंदु एई तकनीक का उपयोग किया गया था। इस जांच कार्य के दौरान, एकीकृत और सिंक्रनाइज़ एई सिस्टम का उपयोग करके रेडियल गेट्स की धीमी गति और मल्टी-चैनल के माध्यम से डाटा का उच्च गति अधिग्रहण किया गया। एई मापदंडों का उपयोग करते हुए, मौजूदा खामियां/असंततताएं (अंतराल), यदि कोई हों, गहन सिग्नल प्रोसेसिंग के माध्यम से पहचानी जाती हैं। अखंडता का आकलन करने के लिए, एई हिट की संख्या, सिग्नल आयाम और सिग्नल शक्ति को ध्यान में लिया गया।
सीएसआईआर-एसईआरसी टीम द्वारा ध्वनिक उत्सर्जन (एई) तकनीक का उपयोग करके पोलावरम बांध में प्रीस्ट्रेस्ड ट्रूनियन बीम की अखंडता का आकलन
आर डी एस ओ परियोजना
रेलवे पुलों के उप-संरचना पर लंबवत बलों का मूल्यांकन और प्रबंधन इस परियोजना के लक्ष्य हैं
- रेलवे पुलों के उप-संरचना पर पडनेवाले विश्लेषणात्मक एवं प्रयोगात्मक दोनों तरह के लंबवत बलों का मूल्यांकन.
- इस्फात एवं पूर्वदबित कंक्रीट पुलों पर लंबवत भारों से संबंधित अभिकल्प प्रावधान केलिए मार्गदर्शी सिद्धांतों का सूत्रीकरण
- लंबवत बलों के प्रशामन केलिए उपयुक्त कार्य पद्धति / तकनीकों का पुनरीक्षण एवं मूल्यांकन
- पुल उप-संरचना पर पडनेवाले लंबवत बलों का मूल्यांकन और इसके प्रशामन केलिए आर डी एस ओ / भारतीय रेलवे के 30 कार्मिकों एवं अभियंताओं को प्रशिक्षण.
अलुमिनो-थर्मिट वेल्डेड रेल संधियों के श्रांति सामर्थ्य मूल्यांकन सी एस आई आर – एस ई आर सी में सफलतापूर्वक किया गया
अलुमिनो-थर्मिट वेल्डेड रेल संधियों के श्रांति सामर्थ्य मूल्यांकन सी एस आई आर – एस ई आर सी में सफलतापूर्वक किया गया
सरकार एवं निजी एजन्सियों से प्राप्त अनेक वेल्डेड रेल संधियों के श्रांति जीवनकाल मूल्यांकन का कार्य, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संस्थान, लखनऊ के विनिर्देशों के अनुसार सी एस आई आर – संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र, चेन्नै में किया गया. ऐ रेल संधि दो मिलियन कानस्टांट एम्प्लिट्यूड सिनुसोइडल साइक्लिक भारण को सहन करना है. ऐ परीक्षण नमूनों की पूरी लंबाई दो मीटर है. इनको 1.5 मीटर की स्पेन से समर्थित किया गया और केंद्र से 75मि.मि. की दूरी पर दो स्थानों में भार को अनुप्रयोग किया गया. तीन नमूनों पर परीक्षण करना है और तीनों रेल संधि निर्धारित चकों को पार करना है
सी एस आई आर – एस ई आर सी द्वारा किए जा रहे ऐसे आधुनिक सामर्थ्य परीक्षण, भारतीय रेल को पटरियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सहायक साबित हो रहे हैं. पिछले तीन दशकों से भारतीय रेलवे को वेल्डेड रेल संधियों की गुणवत्ता की मुल्यांकन केलिए सहयोग देने में सी एस आई आर – एस ई आर सी सबसे आगे रहती आ रही है. अभी हाल ही में भारतीय रेलवे केलिए अलुमिनो-थर्मिट वेल्डेड रेल संधियों की श्रांति सामर्थ्य मूल्यांकन परीक्षण सी एस आई आर – एस ई आर सी ने सफलतापूर्वक किया.
पटरियों के अंतिम भागों को जोडने केलिए विश्व भर में अलुमिनो-थर्मिट प्रक्रमण को व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है. अलुमिनो-थर्मिट वेल्डिंग एक ऐसा प्रक्रमण है जिससे अत्यधिक ढ्लवा धातु से गरम करने से, अलुमिनो-थर्मिट प्रतिक्रिया द्वारा एक धातु आक्साइड और अलुमिनियम के बीच धातुओं को विलयन हो सकती है. अलुमिनो-थर्मिट वेल्डिंग का महत्व यह है कि उसको कार्यस्थल में कर सकते हैं














